Thursday, October 10, 2019

तोमर छंद (अव्यवस्था)

हर नगर है बदहाल।
अब जरा देख न भाल।।
है व्यवस्था लाचार।
दिख रही चुप सरकार।।

वाहन खड़े यक ओर।
पशु सड़क बीच विभोर।।
कुछ बची शर्म न लाज।
हर तरफ जंगल राज।।

मन मौज में कुछ लोग।
हर चीज का उपयोग।।
वे करे निज अनुसार।
बन कर सभी पर भार।।

ये दौड़ अंधी आज।
जा रही दब आवाज।।
आराजकों का शोर।
बस अब दिखाये जोर।।
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12 मात्रा। अंत ताल से आवश्यक। चार चरण। दो दो तुकांत।
बाँट 2-3-2-2-3(ताल)
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बासुदेव अग्रवाल 'नमन'
तिनसुकिया
21-09-19

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