Monday, May 18, 2020

राजस्थानी मुक्तक

विधा   किशोर छंद (22मात्रा,
यति 16,6)

एक आसरो बचग्यो थारो, बालाजी।
बेगा आओ काम सिकारो, बालाजी।
जद जद भीड़ पड़ी भकताँ माँ, थे भाज्या।
दोराँ दिन सें आय उबारो, बालाजी।।

किशोर छंद मूल रूप सें एक मात्रिक छंद है जिसमे चार चरण समतुकांत होते है । प्रत्येक चरण मे 22 मात्राएँ होती है यति16 व 6मात्राओं पर होती है,यदि तीसरे चरण को भिन्न तुकांत करदें तो यही किशोरमुक्तक में परिवर्तित हो जाता है।

इसमे चरणांत मगण222सें हो तो यह और भी सुंदर हो जाता है।

बासुदेव अग्रवाल 'नमन'
तिनसुकिया
5-11-17

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