Wednesday, September 16, 2020

शक्ति छंद (फकीरी)

122  122  122  12

फकीरी हमारे हृदय में खिली।
बड़ी मस्त मौला तबीयत मिली।।
कहाँ हम पड़ें और किस हाल में।
किसे फ़िक्र हम मुक्त हर चाल में।।

वृषभ से रहें नित्य उन्मुक्त हम।
जहाँ मन, बसेरा वहीं जाय जम।।
बना हाथ तकिया टिका माथ लें।
उड़ानें भरें नींद को साथ लें।।

मिले जो उसीमें गुजारा करें।
मिले कुछ न भी तो न आहें भरें।।
कमंडल लिये हाथ मेंं हम चलें।
इसी के सहारे सदा हम पलें।

जगत से न संबंध कुछ भी रखें।
स्वयं में रमे स्वाद सारे चखें।।
सुधा सम समझ के गरल सब पिएँ।
रखें आस भगवान की बस जिएँ।।

बासुदेव अग्रवाल 'नमन'
तिनसुकिया
12-02-19

10 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (18-09-2020) को   "सबसे बड़े नेता हैं नरेंद्र मोदी"  (चर्चा अंक-3828)   पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।  
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ 
    सादर...!--
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 

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  2. अच्छी रचना
    बधाई

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  3. आ0 ज्योति खरे जी बहुत आभार।

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  4. बहुत ही सुंदर हृदयस्पर्शी सृजन आदरणीय सर।
    सादर

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  5. वृषभ से रहें नित्य उन्मुक्त हम।
    जहाँ मन, बसेरा वहीं जाय जम।।
    बना हाथ तकिया टिका माथ लें।
    उड़ानें भरें नींद को साथ लें।।
    वाह!!!
    बहुत ही सुन्दर।

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