Friday, December 18, 2020

गुर्वा (मन)

मन विशाल है एक सरोवर,
स्मृतियों के कंकर,
हल्की सी बस लहर उठे।
***

बसी हुई है मन में प्रीत,
गीत सजन के गूँजे,
हृदय लिया, अनजाना जीत
***

हृदय पटल पर चित्र उकेरे,
जिसने ज्योत जगायी,
मनमंदिर में मेरे।
***

बासुदेव अग्रवाल 'नमन'
तिनसुकिया
17-05-20

No comments:

Post a Comment