Friday, April 16, 2021

राजस्थानी डाँखला (2)

ढोकलास गाँव रो यो ढोकलो हलवाइड़ो,
जिस्यो नाँव बिस्यो डोल ढोलकी सो भाइड़ो।
धोलै बालाँ री है सिर पर छँटणी,
लागै लिपटी है नारैलाँ री चटणी।
तण चालै जिंया यो ही गाँव रो जँवाइड़ो।।
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नेता बण्या जद से ही गाँव रा ये लप्पूजी,
राजनीति माँय बे चलाण लाग्या चप्पूजी।
बेसुरी अलापै राग,
सुण सारा जावै भाग।
बाजण लाग्या तब से ही गाँव में वे भप्पूजी।।
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रेल रा पुराना इंजन धुआँलाल सेठ जी,
कलकत्ता री गल्याँ माँय डोले जमा पेठ जी।
मुँह में दबा धोली नाल,
धुआँ छोड़े धुआँलाल,
पुलिस्यां के सागै पुग्या ठिकाणा में ठेठ जी।।
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बासुदेव अग्रवाल 'नमन'
तिनसुकिया
09-09-20

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