Thursday, October 15, 2020

गुर्वा (प्रशासन)

सोया पड़ा हुआ शासन,

कठिन बड़ा अब पेट भरण,

शरण कहाँ? केवल शोषण,

***


ले रहा जनतंत्र सिसकी,

स्वार्थ की चक्की चले,

पाट में जनता विवस सी।

***


चुस्त प्रशासन भी बेकार,

जनता सुस्त निकम्मी,

लोकतंत्र की लाचारी।

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बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

तिनसुकिया

2-05-20

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