Friday, March 5, 2021

ग़ज़ल (प्यास दिल की न यूँ बढ़ाओ)

बह्र:- 2122  1212  22

प्यास दिल की न यूँ बढ़ाओ तुम,
जान ले लो न पर सताओ तुम।

पास आ के जरा सा बैठो तो,
फिर न चाहे गलेे लगाओ तुम।

चोट खाई बहुत जमाने से,
कम से कम आँख मत चुराओ तुम।

इल्तिज़ा आख़िरी ये जानेमन,
अब तो उजड़ा चमन बसाओ तुम।

खुद की नज़रों से खुद ही गिर कर के,
आग नफ़रत की मत लगाओ तुम,

बीच सड़कों के क़त्ल, शील लुटे,
देख कर सब ये तिलमिलाओ तुम।

ख़ारों के बीच रह के भी ए 'नमन'
खुद भी हँस औरों को हँसाओ तुम।

बासुदेव अग्रवाल 'नमन'
तिनसुकिया
12-02-2017

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