Monday, October 18, 2021

गुर्वा (हवा)

गुर्वा विधा

"हवा"

पूरब में है लाली,
हवा चले मतवाली,
मौक्तिकमय हरियाली।
***

जल तरंग को हवा बजाये,
चिड़ियाँ गाएँ गीत,
प्रकृति दिखाये पग-पग प्रीत।
***

खिली हुई है अमराई,
सनन बहे पुरवाई,
स्वाद चखे नासा मीठा।
***
गुर्वा विधान जानने के लिए यहाँ क्लिक करें ---> गुर्वा विधान

बासुदेव अग्रवाल 'नमन'
तिनसुकिया
10-07-20

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