Wednesday, February 5, 2020

गीतिका (अभी तो सूरज उगा है)

प्रधान मंत्री मोदी जी की कविता की पंक्ति से प्रेरणा पा लिखी ग़ज़ल।

अभी तो सूरज उगा है,
छिटकी पूर्व से प्रभा है।

भानु ये होता प्रखरतर,
आकाश में बढ़ चला है।

अब तलक जो नींद में थे,
उन सब को जगा दिया है।

सबका विकास व विश्वास,
सबके साथ पर टिका है।

तमस की विभावरी गयी,
छा गया अब उजाला है।

उड़ान देश यह भरेगा,
हर और अंबर खुला है।

विकास की नींव पर भवन,
द्रुत गति से शुरू हुआ है।

उत्साह बढ़ गया सब का,
रिपु भीतर तलक हिला है।

'नमन' भोर नव उमंग की,
जगी देश की आशा है।

बासुदेव अग्रवाल 'नमन'
तिनसुकिया
06-06-2019

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