बह्र:- (221 2122)*2
ये हुस्न मौत का तो सामान हो न जाए,
मेरी ये जिंदगी अब तूफान हो न जाए।
बातें जुदाई की तू मुझसे न यूँ किया कर,
सुनके जिन्हें मेरा जी हलकान हो न जाए।
तूने दिया जफ़ा से हरदम वफ़ा का बदला,
इस सिलसिले में उल्फ़त कुर्बान हो न जाए।
वापस वो जब से आई मन्नत ये तब से मेरी,
तकरार फिर से अब इस दौरान हो न जाए।
तब तक दिखे न हमको सब में हमारी सूरत,
जब तक जगत ये पूरा भगवान हो न जाए।
मतलब परस्त इंसां को रब न दे तु इतना,
पा के जिसे कहीं वो हैवान हो न जाए।
ये इल्तिज़ा 'नमन' की उससे कभी किसी का,
नुक्सान हो न जाए, अपमान हो न जाए।
बासुदेव अग्रवाल 'नमन'
तिनसुकिया
15-1-18
ये हुस्न मौत का तो सामान हो न जाए,
मेरी ये जिंदगी अब तूफान हो न जाए।
बातें जुदाई की तू मुझसे न यूँ किया कर,
सुनके जिन्हें मेरा जी हलकान हो न जाए।
तूने दिया जफ़ा से हरदम वफ़ा का बदला,
इस सिलसिले में उल्फ़त कुर्बान हो न जाए।
वापस वो जब से आई मन्नत ये तब से मेरी,
तकरार फिर से अब इस दौरान हो न जाए।
तब तक दिखे न हमको सब में हमारी सूरत,
जब तक जगत ये पूरा भगवान हो न जाए।
मतलब परस्त इंसां को रब न दे तु इतना,
पा के जिसे कहीं वो हैवान हो न जाए।
ये इल्तिज़ा 'नमन' की उससे कभी किसी का,
नुक्सान हो न जाए, अपमान हो न जाए।
बासुदेव अग्रवाल 'नमन'
तिनसुकिया
15-1-18
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