Saturday, June 13, 2020

मुक्तक (सैनिक, क्रांतिकारी)

सरहद पे जो लड़ते हैं, कुछ याद उन्हें कर लें,
जज़्बात जरा उनके, सीने में सभी भर लें,
जो जान लुटाने में, परवाह नहीं करते, 
हम ऐसे ही वीरों के, चरणों में झुका सर लें।

(221 1222)*2
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क्रांतिकारी वीरों से ही देश ये आज़ाद है,
नौनिहालों से वतन के बस यही फ़रियाद है,
भूल मत जाना उन्हें कुर्बानियाँ जिनने हैं दी,
नित 'नमन' उनको करें जिनसे वतन आबाद है।

जिन शहीदों की अमर गाथा घरों में आज है,
देश का उनके ही' कारण अब सुरक्षित ताज है,
इस वतन पे जिसने भी आँखें गड़ा के हैं रखी,
जान ले वो इस वतन का हर जवाँ जाँबाज है।

(2122*3   212)
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सीमा में घुस कर हम ने दुश्मन को ललकारा है,
खैर नहीं दहशतगर्दों पाकिस्तान हमारा है,
ढूँढ ढूँढ के मारेंगे छुपने का अब ठौर नहीं,
भारत की सेना का ये उत्तर बड़ा करारा है।

(2*14)
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बासुदेव अग्रवाल 'नमन'
तिनसुकिया
31-01-17

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