Wednesday, November 11, 2020

पीयूषवर्ष छंद (वर्षा वर्णन)

बिजलियों की गूंज, मेघों की घटा।
हो रही बरसात, सावन की छटा।।
ढोलकी हर ओर, रिमझिम की बजी।
हो हरित ये भूमि, नव वधु सी सजी।।

नृत्य दिखला मोर, मन को मोहते।
जुगनुओं के झूंड, जगमग सोहते।।
रख पपीहे आस, नभ को तक रहे।
काम-दग्धा नार, लख इसको दहे।।

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विधान:-

पीयूषवर्ष छंद।
19 मात्रा।चार चरण, दो दो तुकांत।
2122  2122  212 (गुरु को 2 लघु करने की छूट है। अंत 12 से आवश्यक। यति 10, 9 मात्रा पर।)

बासुदेव अग्रवाल 'नमन'
तिनसुकिया
03-08-20

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