Monday, January 6, 2020

ग़ज़ल (आपके पास हैं दोस्त ऐसे, कहें)

बह्र:- 212*4

आपके पास हैं दोस्त ऐसे, कहें,
साथ जग छोड़ दे, संग वे ही रहें।

दोस्त ऐसे हों जो बाँट लें दर्द-ओ-ग़म,
दिल की पीड़ा को संग_आपके जो सहें।

धैर्य रख जो सुनें बात हैं मित्र वे,
और जो साथ में भावना में बहें।

बेरुखी की जहाँ की लगे आग जब,
मित्र के सीने में भी वे शोले दहें।

मित्र सच्चे 'नमन', मित्र का देख दुख,
हाथ खुद के बढ़ा, मित्र के कर गहें।

बासुदेव अग्रवाल 'नमन'
तिनसुकिया
14-06-19

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