Saturday, April 20, 2019

32 मात्रिक छंद "विधान"

यह चार चरणों का छंद है जो ठीक चौपाई का ही द्विगुणित रूप है। इन 32 मात्रा में 16, 16 मात्रा पर यति होती है तथा दो दो चरणों में चरणान्त तुक मिलाई जाती है। 16 मात्रा के अंश का विधान ठीक चौपाई वाला ही है। यह राधेश्यामी छंद से अलग है। राधेश्यामी के 16 मात्रिक पद का प्रारंभ त्रिकल से नहीं हो सकता उसमें प्रारंभ में द्विकल होना आवश्यक है जबकि 32 मात्रिक छंद में ऐसी बाध्यता नहीं है।

बासुदेव अग्रवाल नमन

No comments:

Post a Comment